कोई भी याचिका दायर करने से पहले फेडरेशन से जरूर संपर्क करें

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कोई भी याचिका दायर करने से पहले फेडरेशन से जरूर संपर्क करें


मौजूदा समय में तंबाकू उद्योग मुकदमों के मकडज़ाल में उलझा हुआ है। एक छोटी सी लापरवाही समूचे उद्योग पर भारी पड़ सकती है। यही कारण है कि स्मोकलेस टौबैको फेडरेशन एक-एक कदम फूंक-फूंक कर रख रहा है। जो मामले चल रहे हैं, उनमें कुछ में कामयाबी मिली है, जबकि कई मामले लंबित हैं। सभी लंबित मामलों का बारीकी से अध्ययन किया किया जा रहा है और फिर पूरी सूझ बूझ के साथ उसमें कदम आगे बढ़ाए जा रहे हैं। फेडेरेशन की नेपाल में हुई एजीएम के दौरान कानूनविद श्री नलिन तलवार ने प्रतिनिधनियों के सामने उद्योग से संबंधित देशभर में चल रहे मुकदमों का विस्तृत ब्योरा पेश किया। साथ ही यह अपील भी किया कि किसी भी राज्य में कोई नोटिफिकेशन आता है तो उसके खिलाफ मामला दायर करने से पहले फेडरेशन को उसकी जानकारी जरूर दी जाए, क्योंकि वही सारे मामलों की निगरानी कर रहा है। उन्होंने दिल्ली में चल रहे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि यहां तंबाकू व जर्दा पर खैनी का मामला लंबित है। स्टे होने के कारण उत्पाद बिक रहे हैं। बिहार का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां छोटी सी कामयाबी मिली है, लेकिन इसे बरकरार रखना है, क्योंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में आने वाला है। इसके लिए सजग रहना होगा। साथ ही उन्होंन साफ किया कि यह भ्रम है कि बिहार में गुटखा खुल गया है। वहां सिर्फ तंबाकू को अनुमति मिली है। इसी तरह पंजाब में प्रतिबंध है, लेकिन धर्मपाल जी की तरफ से याचिका लगाई हुई है, जिसमें एसोसिएशन की मदद भी शामिल है। उन्होंने मांग की है कि उन्हें बेचने न दिया जाए, लेकिन उत्पादन करने दिया जाए। यह मामला लंबित है। अभी राज्य सरकार का जवाब आना है। संजय जी और धर्मपाल जी अपने स्तर पर इसे कर रहे हैं। यह मामला हल होता है तो सभी का फाएदा होगा। इसी तरह हरियाणा में स्टे मिल गया था, लेकिन राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से स्टे निरस्त करा दिया। उन्होंने बताया कि केरल में भी केस डाला गया था। वहां सिंगल बेंच से जीते थे। उसके बाद सरकार जब आई तो दो जजों की बेंच ने आर्डर स्टे कर दिया। अभी फैसला रिजर्व है, वह जल्द आएगा।

इसी तरह असम में एक नोटिस निकाला था और फिर कानून बना दिया गया, हलांकि वहां पर उत्पाद बिक रहे हैं। तलवार के मुताबिक महाराष्ट्र में औरंगाबाद हाईकोर्ट का आर्डर जल्द आ सकता है। वहां पुलिस दुकानदारों को काफी तंग कर रही थी, तो सिर्फ इतना हुआ है कि पुलिस नहींफूड अफसर कार्रवाई कर सकता है। इसी तरह हिमाचल में भी प्रतिबंध लगा हुआ है। वहां बिल नहीं काट सकते हैं। पं बंगाल का मामला यह है कि सरकार ने कोर्ट में कहा है कि जब तक केस लंबित है, तब तक वह कोई एक्शन नहीं लेगी। इस मुकदमें को खत्म कराने में कोई फाएदा नहींहै क्योंकि इसके खत्म होते ही कोई नया नोटिफिकेशन आ जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि शीर्ष अदालत ने सचित्र चेतावनी का मामला कर्नाटक हाईकोर्ट भेज दिया है। मुख्य केस अंकुर गुटखा का है। इसमें गुटखा तंबाकू, सिगरेट पान मसाला सभी हैं। फेडरेशन इस मामले में पूरी तल्लीनता से लगा हुआ है। हलांकि कई एनजीओ व वरिष्ठ वकील खिलाफ में आते हैं। दिल्ली सरकार ने एक वकील नियुक्त कर रखा है। सितंबर तक इसकी सुनवाई होने की उम्मीद है।

इस मौके पर तलवार ने लोगों से दो तरह की अपील की कि वे किसी नोटिफिकेशन को चुनौती देने से पहले उस मामले को फेडरेशन के संज्ञान में जरूर लाएं। दूसरे यदि कोई छोटी सी कामयाबी मिलती है तो उस पर ज्यादा हर्षोल्लास न मनाएं, क्योंकि अफसर व सरकारी अमला इसे अन्यथा ले सकता है।