कम होनी चाहिए जीएसटी की दरें-तंबाकू उद्योग के लोगों की राय

Tobacco Plus > News & Blogs

login Sign In

कम होनी चाहिए जीएसटी की दरें-तंबाकू उद्योग के लोगों की राय

तंबाकू को जीएसटी की परिधि में लाए जाने से इसके नतीजों को लेकर तंबाकू उद्योग के लोगों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। इस बारे में जब राजेश मालपाणी से बात की गई तो उनका कहना था कि जीएसटी का मकसद यह था कि टैक्स की दरें कम हों और ऐसी व्यवस्था हो कि टैक्स पर टैक्स न लगे। यदि टैक्स कम होगा और व्यावहारिक होगा तो उसकी वसूली भी सही तरीके हो सकेगी। लोग ईमादारी से भुगतान करेंगे। उदाहण के तौर पर जिन राज्यों में वैट की दरें बढ़ाई गईं वहां उसकी वसूली कम हो गई। उन्होंने कहा कि तंबाकू पर तो वैसे भी टैक्स के ऊपर टैक्स लगने वाला है, क्योंकि इस पर तो 70 फीसदी एक्साइज अभी वसूली जा रही है। यदि किसी चीज की कीमत 100 रूपए है और उस पर 70 फीसदी एक्साइज लग गया तो वह 170 रूपए की हो जाएगी। फिर जीएसटी 170 रूपए पर लगेगा। यह टैक्स के ऊपर टैक्स की बात है। सरकार को ध्यान रखना चाहिए कि टैक्स व्यवहारिक हो ताकि उसे लागू करने में आसानी हो। टैक्स एक बार ही लिया जाना चाहिए ताकि रिटेलर व दुकानदार से वसूली करने की झंझट ही खत्म हो जाए। तंबाकू के साथ और भी दिक्कत है कि पान वाले कैसे इसे कर पाएंगे? श्री मालपाणी ने कहा कि जैसे पहले था कि तंबाकू पर सिर्फ एक्साइज था, सेल्स टैक्स नहीं था। इसी तरह की व्यवस्था अब भी हो जाए तो ज्यादा अच्छा है। जीएसटी में 18 फीसदी जो प्रस्तावित है, उसमें सर्विस, गुड्स व सभी टैक्स हैं। तंबाकू पर तो एक्साइज टैक्स लगने ही वाला है, फिर ऊपर से जीएसटी लगेगा। उनका मानना है कि जिस तरह के राज्यों में 14 फीसदी वैट लिया जा रहा है उसी तरह जीएसटी भी 12-14 फीसदी से ज्यादा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि दो तरह का जीएसटी होगा एक सेंटर जीएसटी और दूसरा इंटर स्टेट जीएसटी। स्टेट जीएसटी का रेट राज्य तय करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि तंबाकू पर एक समान दरें नहीं लागू की जानी चाहिए क्योंकि खैनी व बीड़ी जैसे उत्पाद गरीब तबके के लोग इस्तेमाल करते हैं। जिस तरह सिगरेट और बीड़ी के टैक्स में अंतर है उसी तरह खैनी और जाफरानी जर्दा में होना चाहिए। बीड़ी और खैनी के जब छोटे-छोटे यूनिट है तो वहां टैक्स कम होना चाहिए। इससे वहां टैक्ट के नियम को लागू करना आसान होगा।

इसी तरह जब इस बारे में सीए केशव मालू से टोबैको प्लस ने बात की तो उन्होंने कहा कि जीएसटी का मामला अभी प्राथमिक स्थिति में है। अभी यह तय नहीं है कि टैक्स 18 फीसदी होगा या 20 फीसदी? वित्तमंत्री अरूण जेटली साफ तौर पर कह चुके हैं कि सरकार की विभिन्न योजनाओं को चलाने के लिए राजस्व जरूरी है। उनका कहना है कि तस्वीर तब साफ होगी जब आईजीएसटी और एसजीएसटी कानून बन जाएगा जीएसटी काउंसिल बन जाएगी तब पता चलेगा कि टैक्स का भार कितना पडऩे वाला है? उन्होंने इतना जरूर कहा कि कोमोडिटी के लिहाज से टैक्स में समानता रहने की उम्मीद है। इसका एक फायदा यह भी होगा कि तंबाकू उद्योग टैक्स का भुगतान करता है, लेकिन उसे क्रेडिट नहीं मिलता है। जीएसटी आने के बाद उद्योग को क्रेडिट मिल सकेगा।