बिहार में प्रतिबंध खत्म

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बिहार में प्रतिबंध खत्म




पटना हाईकोर्ट ने दिया ऐतिहासिक फैसला

महाराष्ट्र से भी अच्छी खबर आने की उम्मीद

नई चुनौतियों को लेकर उद्यमियों में चिंता


प्रभात जर्दा फैक्ट्री की याचिका पर पटना हाईकोर्ट ने पान मसाला व अन्य प्रकार के तम्बाकू उत्पादों के उत्पादन व सेवन पर रोक लगाने वाली अधिसूचना को रद्द कर दिया है। इस फैसले से उद्योग में एक नया उत्साह देखा जा रहा है। लोगों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र व अन्य राज्यों से भी प्रतिबंध हटेगा। यदि बिहार के साथ-साथ महाराष्ट्र से भी रोक हट जाती है तो पिछले एक दशक से संकट का सामना कर रहे स्मोकलेस तंबाकू उद्योह को भारी राहत मिलेगी, क्योंकि दोनों ही राज्य बड़े मार्केट हैं। ध्यान रहे कि मौजूदा समय में देश के आधा दर्जन से अधिक राज्यों में तंबाकू व पान मसाला आदि पर रोक लगी हुई है, जिससे करीब 40 फीसदी मार्केट में तंबाकू उत्पाद गायब हो गए हैं।

बिहार सरकार ने 6 नवंबर को एक अधिसूचना जारी कर प्रतिबंध की अवधि को 1 साल के लिए बढ़ा दिया था। इसमें सभी किस्म की तंबाकू, पान मसाले व सुगंधित सुपारी आदि शामिल थे। इस मामले पर कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश इकबाल अहमद अंसारी एवं न्यायाधीश चक्रधारी शरण सिंह की दो सदस्यीय खंडपीठ ने पहले ही सुनवाई कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

इस मामले में प्रभात जर्दा की तरफ से पेश हुए वकीलों ने दलील दिया कि फूड कमिश्नर और राज्य सरकार को प्रतिबंध लगाने का अधिकार नहीं है। केेंद्र सरकार ही सिगरेट व अन्य तंबाकू उत्पाद (निषेध व व्यापार और वाणिज्य उत्पादन आपूर्ति तथा वितरण विनियमन) अधिनियम 2003 (कोटपा) के तहत कार्रवाई कर सकती है।

हालांकि राज्य सरकार की तरफ से भी दावा किया गया कि उसे खाने-पीने की चीजों के मामले में कार्रवाई करने का अधिकार है। जानकारों का कहना है कि बिहार में भी खाद्य संरक्षा अधिनियम को परिभाषित करने का मामला है। यह बात सही है कि राज्य सरकार को खाने-पीने की चीजों पर नजर रखने व आवश्कतानुसार उस पर रोक लगाने का अधिकार है। खाद्य संरक्षा अधिनियम की धारा 3 में कहा गया है कि किसी भी खाद्य पदार्थ में तंबाकू या निकोटीन नहीं मिलाया जा सकता है। यदि ऐसा कोई मामला आता है तो राज्य सरकारों को कार्रवाई करने का पूरा हक है, लेकिन जो चीज खाद्य पदार्थ है ही नहीं तो उस पर खाद्य संरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई नहीं हो सकती है। तंबाकू खाद्य पदार्थ की श्रेणी में आती ही नहींहै, इसलिए जब भी इस तरह का मामला सामने आता है तो अदालत से उद्योग को राहत मिलती है। बिहार के मामले में दो बिन्दु थे। एक तो राज्य सरकार का अधिकार क्षेत्र दूसरे खाद्य संरक्षा कानून के तहत हुई कार्रवाई। कुछ वर्र्ष पहले केरल हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा था कि तंबाकू उत्पादों पर खाद्य संरक्षा अधिनियम के तहत पाबंदी नहींलगाई जा सकती है। साथ ही राज्य सरकार को यह सुझाव भी दिया था कि तंबाकू उत्पादों पर कोटपा के तहत कार्रवाई हो सकती है। इसी तरह बांबे हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद महाराष्ट्र में हुक्के पर लगी पाबंदी खत्म हो गई है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ तौैर पर कहा कि तंबाकू खाद्य वस्तु नहींहै, लिहाजा खाद्य संरक्षा अधिनियम के तहत इस पर कार्रवाई नहीं की जा सकती है। हरियाणा और दिल्ली हाईकोर्ट में भी उद्योग की तरफ से पेश हुए वकीलों ने राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी थी। साथ ही खाद्य संरक्षा अधिनियम का मामला भी उठाया। अहम बात यह है कि दोनों राज्य में हाईकोर्ट से स्टे मिला। हरियाणा सरकार ने इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया, जिसका नतीजा यह हुआ कि शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के स्टे को खत्म कर दिया। लेकिन दिल्ली में अभी प्रतिबंध पर स्टे लगा हुआ है। ध्यान रहे कि पहले पटना हाईकोर्ट ने बिहार सरकार के प्रतिबंध संबंधी फैसले पर रोक लगा थी, लेकिन राज्य सरकार ने जब सुप्रीम कोर्ट में अपील की तो हाईकोर्ट का स्टे खत्म कर दिया गया। शीर्ष अदालत ने 7 अगस्त तक प्रतिबंध को जारी रखने का आदेश दिया था। इस फैसले के बारे में जब उद्योग के लोगों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इससे बहुत बड़ी राहत मिली है, लेकिन अभी महाराष्ट्र समेत कई बड़े राज्यों में रोक लगी हुई है। यदि वहां से भी प्रतिबंध खत्म होता है तो स्मोकलेस तंबाकू व पान मसाला उद्योग का भला होगा। उनका कहना है कि महाराष्ट्र में औरंगाबाद हाईकोर्ट के आदेश से पान वालों को पुलिस के डंडे से तो राहत मिल गई है, लेकिन अंतिम फैसला अभी आना बाकी है। लोगों को उम्मीद है कि यह फैसला उद्योग के पक्ष मेें होगा। दरअसल महाराष्ट्र में पुलिस दुकानदारों को काफी परेशान कर रही थी। अदालत ने अपने आदेश में पुलिस के हस्तक्षेप को रोक दिया है। अब कार्रवाई का अधिकार सिर्फ फूड अफसर के पास है।

अहम बात यह है कि कई राहत भरी खबरों के बावजूद लोगों के मन में विभिन्न मुद्दों को लेकर आशंका अभी भी बनी हुई है। उन्हें इस बात का भय सता रहा है कि कहीं आने वाले दिनों में सरकार रमेश चंद्रा कमेटी की सिफारिशों के आधार पर कोटपा में संशोधन के लिए कदम आगे न बढ़ा दे। रमेश चंद्रा कमेटी ने जिस तरह की सिफारिशें की हैं, उससे तंबाकू खास तौर पर स्मोकलेस तंबाकू उद्योग का टिके रह पाना मुश्किल हो जाएगा। इस समिति का गठन जुलाई 2014 को किया गया था। इसकी सिफारिशों के मुताबिक कम से कम 25 साल की उम्र वाले युवाओं को ही तंबाकू उत्पाद उपभोग की अनुमति दी जानी चाहिए, जबकि वर्तमान में इसके लिए न्यूनतम उम्र 18 साल है। साथ ही यह भी कहा है कि सिगरेट व अन्य तंबाकू उत्पाद (निषेध व व्यापार और वाणिज्य उत्पादन आपूर्ति तथा वितरण विनियमन) अधिनियम 2003 (कोटपा) की धारा 20 के अंतर्गत पैकेट पर निकोटिन और राल (टार) सामग्री का उल्लेख नहीं करने पर जुर्माने को 5000 रुपये से बढ़ाकर 50000 रुपए किया जाए। इसके अलावा और भी कई कड़ी शर्तें हैं, जिन्हें लागू करने का मतलब है कि स्मोकलेस तंबाकू उद्योग को ताला लगाना। कुछ राज्य जो खुली सिगरेट की बिक्री रोकने का फंडा अपना रहे हैं, वह इसी समिति की सिफारिश की देन है।

लोगों में कोटपा के संशोधन की आशंका तो है ही, साथ ही उन्हें इस बात की भी चिंता है कि निकट भविष्य में उन्हेंं पैकेजिंक, जीएसटी व पाप कर (सिन टैक्स) जैसे कई सवालों से जूझना होगा। तमाम उद्यमी जीएसटी के टैक्स स्लैब को लेकर चिंतित हैं। वे पहले से ही 70 फीसदी एक्साइज का भुगतान कर रहे हैं। ऊपर से उन्हें जीएसटी भी देना होगा। जीएटी 2 तरह के होंगे। एक तो सेंट्रल जीएसटी होगा, जिसकी सीमा 18 से 20 फीसदी तक रहने की उम्मीद है। इसके बाद इंटरस्टेट जीएसटी भी होगा जो राज्य लगाएंगे। कौन सा राज्य तंबाकू व पान मसाल पर कितना टैक्स लगाएगा, यह बात अभी किसी को नहींमालूम है। उद्योग के लोग मशीन आधारित लेवी प्रणाली से पहले ही मुसीबत में हैं। अब जीएसटी की दरें भी ऊंची रहीं तो उन्हें काफी दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। मशहूर उद्यमी श्री राजेश मालपाणी व अन्य कई उद्यमियों का कहना है कि सरकार को जीएसटी की दरें कम रखनी चाहिए। इससे राजस्व की प्राप्ति अधिक होगी। टैक्स की दरें ज्यादा रहने से उसकी वसूली पर असर पड़ता है। इसी तरह कई और सवाल हैं जो उद्यमियों को चिंता में डाल रहे हैं। बहरहाल इसबीच एक और अच्छी बात देखने को मिल रही है कि उद्योग के लोग हर लड़ाई को एकजुट हो कर लड़ रहे हैं। स्मोकलेस तंबाकू से जुड़े संगठन बीड़ी उद्योग के लोगों, दुकानदारों व किसानों को अपने साथ जोड़ रहे हैं, जिससे यह उद्योग एक बड़ी ताकत बनने की तरफ आगे बढ़ रहा है। उद्योग का दायरा बढऩे पर आने वाली किसी भी चुनौती का सामना करना आसान होगा।